• 'सोशल मीडिया को भेड़िया बनने में वक्त नहीं लगता'

    बाल कलाकार के रूप में सशक्त पारी खेलनेवाले ने हीरो के रूप में भी अच्छी फिल्में दीं, मगर कुछ अरसे से वह बड़े परदे से दूर थे। पिछली फिल्म 'कलंक' में उनका काम पसंद किया गया और अब वह एक लंबे अरसे बाद '' में मोहित सूरी जैसे उस निर्देशक के साथ नजर आएंगे, जिन्होंने उन्हें कलयुग जैसी हिट फिल्म दी थी। उनसे एक खास बातचीत: 'कलयुग' से जबरदस्त शुरुआत के बावजूद निर्देशक मोहित सूरी और आप एक लंबे अंतराल के बाद अब 'मलंग' में आ रहे हैं?मैं यह बात खूद उससे पूछता था कि हम दोनों ने एक साथ इतनी अच्छी शुरुआत की थी, हमारे साथ न आने की क्या वजह रही है? मैं उससे भी अक्सर इसका कारण पूछता था, तो वह बोलता था हम कुछ करेंगे तो खास होना चाहिए। मोहित कुछ ऐसा करना चाहता था जिसमे हम कुछ अलग हटकर दिखें। हालांकि मुझे यह एक बहाने जैसे लगता था। फिर मुझे उन पर विश्वास करना पड़ा, क्योंकि जब मलंग मेरे पास आई थी तकरीबन 2 साल पहले की बात है। मोहित ने मुझे फिल्म की कहानी सुनाई थी, तब मुझे लगा था कि मैंने ऐसा कैरेक्टर कभी निभाया ही नहीं। उसने मुझे पूछा कि तुझे माइकल कैसा लगा? मैंने बोला, माइकल अच्छा लग रहा है और मैं वही करूंगा। आखिर में मोहित ने मुझे बताया कि मैं तेरे लिए माइकल ही सोच रहा था। आप कामयाब चाइल्ड आर्टिस्ट रहे हैं और लीड स्टार के रूप में भी अच्छी शुरुआत की थी। क्या आपको लगता है कि चाइल्ड आर्टिस्ट के लिए बतौर लीड आर्टिस्ट जमीन पुख्ता करने में मुश्किल होती है?मेरे हिसाब से हमारे लिए यह बात दोनों तरफ से समझना जरूरी है। जैसे अगर आप किसी बच्चे को साल दर साल देखते रहते हैं और वह आपकी आंखों के सामने स्क्रीन पर बड़ा होता है। यह बात इस उदाहरण से सही मायनों में समझा जा सकता है कि जैसे मां-बाप के लिए बच्चा हमेशा बच्चा ही रहता है। मुझे लगता है कि जब दर्शक कुछ देखते हैं, वह भी हमारे लिए मां-बाप की तरह ही होते हैं, क्योंकि उनका रिश्ता उस ऐक्टर के साथ स्थापित हो जाता है, इसलिए वह फर्क नहीं देख पाते हैं। इसलिए जब मैं छोटा था तब मैंने 'जख्म' के बाद काम करना बंद कर दिया था। तब मेरी आवाज, कद, चेहरा बदलना शुरू हुआ था। वह एक रिस्क था, मगर इसी के साथ ऐसे कई उदहारण हैं, जैसे हॉलिवुड में लिओनार्डो डीकैप्रिओ, जॉनी डेप यह दोनों हमेशा से एक चाइल्ड स्टार रहे हैं। फिर लोगों ने उन्हें अडल्ट ऐक्टर के रूप में भी स्वीकारा। हमारे यहां भी उर्मिला मातोंडकर, आफताब शिवदासानी जैसे कई लोग चाइल्ड ऐक्टर के रूप में काम कर चुके हैं। यह चीज ऐक्टर के लिए आशीर्वाद भी हो सकता है और अभिशाप भी। 'कलंक' में आपका काम पसंद किया गया, मगर फिल्म नहीं चली?यह सवाल मैं अपने आप से भी पूछता हूं कि फिल्म क्यों नहीं चली? इसका जवाब मुझे दुर्भाग्य से यही लगता है कि हम ऐक्टर्स स्पोर्ट्समैन नहीं हैं। जैसे अगर हमें अच्छा टेनिस खेलना आता है, तो हम किसी के साथ खेल कर उसको हरा दें। हम ऐक्टर्स तो एक मशीन के स्पेयर पार्ट की तरह हैं। हम उस गाड़ी (फिल्म) के कुछ हिस्से जैसे हैं। उसी के साथ उस में और भी पार्ट्स हैं, जिन्हें अपने आपको साबित करना पड़ता है। फिल्म 'मलंग' में आपके साथ आदित्य रॉय कपूर, दिशा पाटनी के अलावा अनिल कपूर भी हैं। उनसे किस तरह के टिप्स मिलते थे?इस मामले में हमारे बीच उल्टा है, वह यह सब टिप्स-विप्स हमसे पूछते हैं। वह बड़े स्मार्ट हैं। मैं इसके लिए उनकी बड़ी इज्जत करता हूं, हमने भी उनसे बहुत कुछ सीखा है। वह बहुत इम्प्रोवाइज करते हैं। हर एक ऐक्टर या टेक्नीशियन को उतनी ही इज्जत देते हैं। उनके पास अनुभव का इतना बड़ा भंडार होने के बावजूद वह किसी को बताते नहीं कि आप ऐसा करो या वैसा करो। कभी-कभी तो कहते हैं कि तू सही कर रहा है, मैं अपना बदल देता हूं, इससे हम एक-दूसरे के लिए अच्छा करेंगे। पहले तो मैं अनिल कपूर द ऐक्टर का फैन था पर अब अनिल कपूर द पर्सन का फैन हूं। सोहा (उनकी अभिनेत्री पत्नी सोहा अली खान) आपको कैसे कॉम्पलिमेंट करतीं हैं?मैं हमेशा कहता हूं कि आपको अपनी जिंदगी में सही जगह इन्वेस्ट करना होता है मतलब फैमिली में इन्वेस्ट करना जरूरी है। सच तो यह है कि सोहा मेरे समझदार रहने की एक वजह हैं। शायद इसीलिए हमारी दोस्ती प्यार में बदली और हमारी शादी हो गई, क्योंकि हम एक-दूसरे को बड़ी अच्छी तरह से समझते हैं। मैं उनकी और उनकी राय की बहुत इज्जत करता हूं। अब मैं उसे सलाह कह रहा हूं, मगर हमारे बीच बहुत बहस होती है। वह मेरी हां में हां नहीं मिलाती, यही बात सबसे अच्छी लगती है। सोशल मीडिया पर तैमूर और इनाया जैसे स्टार किड्स का बहुत क्रेज है, हमारे पापाराजी उन्हें कैप्चर करने की कोशिश करते हैं, आप इसको कैसे देखते हैं?यह सबके लिए बहुत नया है। यह पापाराजी कल्चर हमारे यहां लगभग 4 साल पहले आया था। मैं हमेशा कहता हूं कि हमें सोशल मीडिया को सोशल भेड़िया बनाने में समय नहीं लगेगा। यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम इसको किस तरह से संभाले। जब हमें कहा जाता है कि तैमूर और इनाया तो अभी से ही स्टार्स हैं? तो मैं कहता हूं कि यह बहुत खुश होने की बात नहीं है। उन बेचारों को तो इस कॉन्सेप्ट के बारे में पता भी नहीं है। जाने-अनजाने में उन पर अभी से बहुत सारी उम्मीदें और एक्सपेक्टेशन डाल दी गईं हैं। मुझे नहीं पता है कि यह एक्सपोजर अच्छा है या बुरा, क्योंकि इस में मैं कोई एक्सपर्ट नहीं हूं। हमने व्यक्तिगत रूप से सोचा था कि हम उसे (इनाया) को इस चीज से डराएंगे नहीं। फटॉग्रफर्स को लेकर हमारे अनुभव अच्छे रहे हैं। जब वह छोटी थी और हमने कहा कि फ्लैश मत कीजिए, तो लोगों ने बात सुनी है। एकाध बार जूम लेंस लगा कर फोटोज ली गई हैं और तब हमने मना किया।


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